Anand Kumar Ashodhiya — Author · Poet · Researcher
अधराजण (संशोधित व द्वितीय संस्करण)
Adhirājan (Edition II) — पिंगल शास्त्र और भारतीय वाचिक परंपरा पर आधारित हरियाणवी रागनी लोक-महाकाव्य

पुस्तक विवरण
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| अंग्रेज़ी शीर्षक | Adhirājan (Edition II) |
| लेखक | आनन्द कुमार आशोधिया (कवि आनन्द शाहपुर) |
| भाषा | हिन्दी / हरियाणवी |
| पृष्ठ संख्या | 229 |
| प्रकाशन वर्ष | 2025 (संशोधित व द्वितीय संस्करण) |
| ISBN | 978-93-5469-116-4 |
| विधा | लोक महाकाव्य (रागनी) · पिंगल छंदशास्त्र · सांस्कृतिक अध्ययन |
| शैक्षणिक क्षेत्र | हरियाणवी लोक-साहित्य, पिंगल शास्त्र, वाचिक परंपरा, प्रदर्शनकारी कला, ऐतिहासिक पुनर्पाठ |
| प्रकाशक | अविकावाणी पब्लिशर्स (Avikavani Publishers) |
पुस्तक के बारे में
“अधराजण” एक सांस्कृतिक, साहित्यिक और शोधपरक महाकाव्य है, जो हरियाणवी लोककाव्य की रागनी परंपरा को आधुनिक साहित्यिक विमर्श से जोड़ता है। यह ग्रंथ केवल एक प्रेमकथा नहीं है, बल्कि सत्ता, आत्मबलिदान और सांस्कृतिक पुनर्पाठ का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। लेखक आनन्द कुमार आशोधिया ने इस कृति में हरियाणवी लोकगीतों की आत्मा को पिंगल शास्त्र, ऐतिहासिक अभिलेखों और समकालीन आलोचना के माध्यम से पुनर्व्याख्यायित किया है।
कथानक की धुरी
कथानक महाराजा जगत सिंह, रसकपूर अधराजण और फतेहकँवर के त्रिकोणीय ऐतिहासिक-सांस्कृतिक संबंधों के इर्द-गिर्द घूमता है। यह आख्यान केवल वैयक्तिक अनुराग का नहीं, बल्कि राजसत्ता और लोकसंस्कृति के द्वंद्व का भी जीवंत दस्तावेज है। अधराजण का चरित्र एक ऐसी स्त्री का प्रतीक बनकर उभरता है जो लोकस्मृति में अमरता प्राप्त करती है और सत्ता के षड्यंत्रों के मध्य अपनी आत्मिक गरिमा को अक्षुण्ण बनाए रखती है।
प्रमुख विशेषताएँ
- 30 मूल रागनियाँ: प्रत्येक रागनी के साथ उसका विस्तृत संदर्भ-वृत्तांत और आलोचनात्मक विश्लेषण।
- पिंगल शास्त्र आधारित विधान: पारंपरिक मात्रिक छंद संरचना का वैज्ञानिक विश्लेषण।
- ऐतिहासिक साक्ष्य: तत्कालीन दरबारी अभिलेखों और महाराजा जगत सिंह के कालखंड का प्रामाणिक संदर्भ।
- तुलनात्मक समीक्षा: अन्य लोक-संस्करणों एवं सांग शैलियों के साथ विश्लेषणात्मक अध्ययन।
- गुरु-शिष्य परंपरा: लोककवि पालेराम दहिया जी की परंपरा के प्रति समर्पित।
- द्वितीय संस्करण विशेष: यह 2025 का द्वितीय संस्करण 2022 के मूल संस्करण की तुलना में अधिक परिष्कृत, नई रागनियों, समालोचनात्मक टिप्पणियों और छंद विस्तार से सुसज्जित है।
“जो मिट्टी में गीत बोता है, वो पीढ़ियों तक संस्कृति का चांद उगाता है।”
अधराजण उसी सांस्कृतिक आभा की एक साहित्यिक प्रस्तुति है।
उद्धरण कैसे दें
Ashodhiya, Anand Kumar. (2025). Adhirājan (Edition II). Avikavani Publishers.
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title = {Adhirājan (Edition II)},
author = {Ashodhiya, Anand Kumar},
year = {2025},
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isbn = {978-93-5469-116-4},
language = {Hindi},
note = {Revised and Expanded Edition. Haryanvi Ragni Folk Epic rooted in Pingal Shastra},
url = { https://anandkumarashodhiya.github.io/anand-kumar-ashodhiya/books/adhirajan-edition-2.html }
}
संबंधित शोध प्रकाशन
इस महाकाव्य पर आधारित लेखक के विस्तृत शोध-पत्र:
- Adharajan (Ragnis 1–8) — Pingal Prosody Analysis
- Adharajan (Ragnis 9–16) — Cultural and Folk Study
- Heer–Ranjha (Ragnis 1–7) — Pingal Prosody Analysis
- Bhagat Puranmal — Literary & Cultural Review
शैक्षणिक प्रभाव
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- हरियाणवी छंद-शब्दावली — पिंगल शास्त्र और हरियाणवी छंद-विज्ञान की शब्दावली
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