किस्सा भगत पूरणमल (रागनी 1–8)
भक्ति, नैतिक प्रतिरोध एवं पिंगल छंद का विश्लेषण
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Author: आनन्द कुमार आशोधिया
Journal: International Journal of Hindi Research
Year: 2026 | Volume: 12 | Issue: 2 | Pages: 92–94
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📖 सार (Abstract)
प्रस्तुत शोध-पत्र में ‘किस्सा भगत पूरणमल’ की रागनी 1–8 का साहित्यिक, सांस्कृतिक, दार्शनिक तथा पिंगल-छंदात्मक दृष्टियों से विश्लेषण किया गया है। अध्ययन यह प्रतिपादित करता है कि यह कृति भक्ति, नैतिक प्रतिरोध, सामाजिक न्याय और आध्यात्मिक पुनर्जन्म की बहुस्तरीय प्रक्रिया को अभिव्यक्त करती है।
🔑 Keywords
हरियाणवी रागनी, पिंगल शास्त्र, भक्ति साहित्य, लोकसाहित्य, नैतिक प्रतिरोध, छंद-विधान
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