Anand Kumar Ashodhiya — Author · Poet · Researcher
हीर राँझा — हरयाणवी लोक रागणी संग्रह (पिंगल समीक्षा सहित)
Heer Ranjha — Haryanvi Lok Ragni Sangrah (Pingal Samiksha Sahit) — छंदशास्त्र, यति-विराम एवं शास्त्रीय विधान की कसौटी पर परखा गया अमर लोक-प्रेमाख्यान

पुस्तक विवरण
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| अंग्रेज़ी शीर्षक | Heer Ranjha — Haryanvi Ragni Collection (With Pingal Review) |
| लेखक | आनन्द कुमार आशोधिया (कवि आनन्द शाहपुर) |
| भाषा | हिन्दी / हरयाणवी |
| पृष्ठ संख्या | 241 |
| प्रकाशन वर्ष | 2024 |
| ISBN | 978-81-989952-9-2 |
| विधा | लोककाव्य (रागणी) · पिंगल छंदशास्त्र · सांस्कृतिक समीक्षा |
| शैक्षणिक क्षेत्र | हरियाणवी लोक-साहित्य, छंद-विज्ञान, वाचिक परंपरा, प्रदर्शनकारी कला, तुलनात्मक लोक-साहित्य |
| प्रकाशक | स्वयं प्रकाशित (आनन्द कुमार आशोधिया) |
पुस्तक के बारे में
“हीर राँझा – हरयाणवी लोक रागणी संग्रह (पिंगल समीक्षा सहित)” हरियाणवी लोक-संस्कृति की आत्मा को छंदों और सुरों में बाँधने का एक अद्वितीय साहित्यिक व शास्त्रीय प्रयास है। हीर राँझा की अमर प्रेमगाथा को हरियाणवी रागणी शैली में प्रस्तुत करते हुए लेखक आनन्द कुमार आशोधिया ने इसे केवल एक भावनात्मक प्रेमाख्यान नहीं, बल्कि एक सुव्यवस्थित शास्त्रीय एवं सांस्कृतिक दस्तावेज़ बना दिया है।
पिंगल समीक्षा: छंदशास्त्र की कसौटी पर लोककथा
इस संग्रह की सबसे प्रमुख विशेषता इसकी पिंगल समीक्षा है। प्रत्येक रचना को छंद-विधान, यति-विराम, वर्ण-गणना, मात्रा-गणना और दोष-लक्षण की दृष्टि से विश्लेषित किया गया है। लेखक ने दोहा, चौपाई, रोला, सोरठा, दुकलिया जैसे पारंपरिक छंदों का प्रयोग करते हुए भाव और शास्त्र का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत किया है। यह पहल हरयाणवी रागणी को केवल गेय विधा से आगे बढ़ाकर अकादमिक शोध के केंद्र में प्रतिष्ठित करती है।
रसों का त्रिवेणी संगम
इस संग्रह में भाव और कला का संतुलित सामंजस्य दिखाई देता है:
- श्रृंगार रस: हीर-राँझा की पहली नज़र का अनुराग और प्रणय-स्मृति।
- करुण रस: हीर का विरह, वियोग-वेदना और राँझा का वैराग्य।
- वीर रस एवं प्रतिरोध: राँझा का सामाजिक विषमताओं और दरबार में न्याय के लिए दृढ़ संकल्प।
सामाजिक चेतना एवं सांस्कृतिक पुनर्जागरण
यह संग्रह हीर की पीड़ा, राँझा के त्याग, सेहती की वाकपटुता और कैदू की कुटिलता को लोकबोली की सहजता में जीवंत करता है। पुस्तक का अंतिम भाग हीर-राँझा को लोकदेवता के रूप में प्रतिष्ठित कर लोकसंस्कृति की निरंतरता को रेखांकित करता है। आज जब लोक-संस्कृति विस्मृति के संकट से जूझ रही है, यह संग्रह लोक और शास्त्र के सेतु के रूप में एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण का आह्वान करता है।
उद्धरण कैसे दें
Ashodhiya, Anand Kumar. (2024). Heer Ranjha: Haryanvi Lok Ragni Sangrah (Pingal Samiksha Sahit). Self-published.
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संबंधित शोध प्रकाशन
इस ग्रंथ पर आधारित लेखक के विस्तृत शोध-पत्र:
- Heer–Ranjha (Ragnis 1–7) — Pingal Prosody Analysis
- Heer–Ranjha (Ragnis 8–16) — Cultural Study
- Heer–Ranjha (Ragnis 23–28) — Advanced Cultural Analysis
- Bhagat Puranmal — Literary & Cultural Review
शैक्षणिक प्रभाव
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उपलब्धता
तकनीकी शोध प्रलेखन
भाषाई संसाधन, ग्रंथसूची, शोध-पद्धति और तकनीकी प्रलेखन प्रोजेक्ट विकि पर उपलब्ध हैं:
- शोध विकि मुख्य पृष्ठ — परियोजना का परिचय और शोध-प्रलेखन
- पिंगल शास्त्र पद्धति — हरियाणवी रागनी विश्लेषण की तकनीकी पद्धति
- ग्रंथसूची एवं शोध सूचकांक — ISBN-युक्त पुस्तकों और DOI-अनुक्रमित प्रकाशनों की ग्रंथसूची
- हरियाणवी छंद-शब्दावली — पिंगल शास्त्र और हरियाणवी छंद-विज्ञान की शब्दावली
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© 2026 Anand Kumar Ashodhiya | Independent Researcher & Former Warrant Officer, Indian Air Force