Anand Kumar Ashodhiya

Official website of Anand Kumar Ashodhiya, author, researcher and independent scholar of Haryanvi Ragni, Pingal Shastra, Indian folk poetics, oral traditions and North Indian performance literature.

View project on GitHub

Anand Kumar Ashodhiya Anand Kumar Ashodhiya — Author · Poet · Researcher

अधराजण (प्रथम संस्करण) — हरियाणवी किस्सा (रागनी साँग शैली मे)

Adhirājan (Edition I) — रसकपूर, जयपुर रियासत और ऐतिहासिक प्रेम-गाथा पर आधारित 21 रागनियों व वृत्तांतों का लोक-नाट्य संकलन

अधराजण (प्रथम संस्करण) — पुस्तक आवरण

पुस्तक विवरण

विवरण जानकारी
अंग्रेज़ी शीर्षक Adhirājan (Edition I) — Folk Epic in Ragni Form
लेखक आनन्द कुमार आशोधिया (कवि आनन्द शाहपुर)
भाषा हरियाणवी / हिन्दी
पृष्ठ संख्या 45
प्रकाशन तिथि / वर्ष 30 जून 2021 / 2022
ISBN 978-81-958735-0-0
विधा लोक महाकाव्य (रागनी) · साँग शैली · ऐतिहासिक किस्सा
शैक्षणिक क्षेत्र हरियाणवी लोक-नाट्य (साँग), रागनी परंपरा, पिंगल शास्त्र, मौखिक इतिहास, राजपूताना रियासती इतिहास
प्रकाशक डी. जे. पब्लिकेशन (DJ Publication)

पुस्तक के बारे में

किस्सा “अधराजण” हरियाणवी रागनी (साँग शैली मे) लोक-नाट्य और रागनी परंपरा का एक सजीव व प्रामाणिक दस्तावेज़ है। हरियाणवी भाषा में लोक-नाट्य को ‘साँग’ कहा जाता है, जिसका अर्थ स्वाँग रचना, भेष बदलना एवं लोकगीत व लोककथाओं के माध्यम से नाटक प्रस्तुत करना है। इसे केवल एक सामान्य रागनी संग्रह कहना उचित नहीं होगा, क्योंकि इसमें संकलित सभी 21 रागनियाँ तत्कालीन जयपुर महाराज जगत सिंह की रियासत और ऐतिहासिक घटनाओं के ताने-बाने से जुड़ी हुई हैं।

कथानक और नाट्य शिल्प

पुस्तक में प्रत्येक रागनी के साथ उसका विस्तृत ऐतिहासिक वृत्तांत दिया गया है, जो उस रागनी की उत्पत्ति की पृष्ठभूमि और उसमें अभिव्यक्त मनोभावों को स्पष्ट करता है। यह कृति किसी जीवंत नाट्य दृश्य की भाँति पाठक को मुख्य किरदार रसकपूर (अधराजण) के जीवन, त्याग, सौंदर्य और अंतर्मन में झांकने का अवसर प्रदान करती है। साथ ही, यह तत्कालीन जयपुर राजघराने में रसकपूर के प्रभाव से उत्पन्न राजनीतिक हलचलों और उठापटक से भी परिचित कराती है।

रसकपूर एक भक्तन थीं, जो नृत्य और संगीत में अत्यंत प्रवीण, स्वाभिमानी और अद्वितीय सुंदरी थीं। तत्कालीन जयपुर महाराजा जगत सिंह पहली नज़र में ही उन पर मुग्ध हो गए और कालांतर में उन्हें ‘अधराजण’ (आधे राज्य की स्वामिनी) घोषित किया। रसकपूर और महाराजा जगत सिंह के अमर अनुराग तथा सत्ता-संघर्ष से जुड़ी ये रागनियाँ हरियाणवी लोक-साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं।

उद्धरण कैसे दें

Ashodhiya, Anand Kumar. (2022). Adhirājan (Edition I): Haryanvi Kissa (Ragni Saang Shaili Me). DJ Publication.

@book{ashodhiya2022adhirajan1,
  title     = {Adhirājan (Edition I): Haryanvi Kissa (Ragni Saang Shaili Me)},
  author    = {Ashodhiya, Anand Kumar},
  year      = {2022},
  publisher = {DJ Publication},
  isbn      = {978-81-958735-0-0},
  language  = {Haryanvi},
  note      = {Foundational Folk Epic in Ragni and Saang Dramatic Style with Historical Narratives},
  url       = { https://anandkumarashodhiya.github.io/anand-kumar-ashodhiya/books/adhirajan-edition-1.html }
}

संबंधित शोध प्रकाशन

इस ग्रंथ पर आधारित लेखक के विस्तृत शोध-पत्र:

शैक्षणिक प्रभाव

उद्धरण, DOI-अनुक्रमित प्रकाशन, शोध-प्रोफ़ाइल और मापदंड देखने के लिए: उद्धरण एवं DOI सूची

उपलब्धता

(नोट: प्रथम संस्करण वर्तमान में अनुपलब्ध होने के कारण, संशोधित एवं परिवर्धित द्वितीय संस्करण के लिंक नीचे उपलब्ध हैं)

← पुस्तकों की सूची पर लौटें

तकनीकी शोध प्रलेखन

भाषाई संसाधन, ग्रंथसूची, शोध-पद्धति और तकनीकी प्रलेखन प्रोजेक्ट विकि पर उपलब्ध हैं:

🌐 Official Academic & Research Profiles

Citation counts, indexing records, and metadata visibility are periodically updated by their respective platforms. For formal scholarly reference, please use permanent identifiers and DOI-linked resources wherever available.

© 2026 Anand Kumar Ashodhiya | Independent Researcher & Former Warrant Officer, Indian Air Force