Anand Kumar Ashodhiya — Author · Poet · Researcher
अथ मार्जरिका उवाच
Ath Marjarika Uvaach — भारतीय इतिहास और राष्ट्रीय चेतना का एक प्रतीकात्मक एवं दार्शनिक पुनर्पाठ

पुस्तक विवरण
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| अंग्रेज़ी शीर्षक | Ath Marjarika Uvaach |
| लेखक | आनन्द कुमार आशोधिया (कवि आनन्द शाहपुर) |
| भाषा | हिन्दी |
| पृष्ठ संख्या | 180 |
| प्रकाशन वर्ष | 2025 (प्रथम संस्करण) |
| ISBN | 978-93-5619-397-0 |
| विधा | ऐतिहासिक महाकाव्य · प्रतीकात्मक कविता · राजनीति एवं समाज · दार्शनिक आख्यान |
| शैक्षणिक क्षेत्र | भारतीय इतिहास, प्रतीक-विज्ञान (Semiotics), राजनीतिक समाजशास्त्र, आधुनिक हिन्दी काव्य, राष्ट्रीय चेतना |
| प्रकाशक | अविकावाणी पब्लिशर्स (Avikavani Publishers) |
पुस्तक के बारे में
“अथ मार्जरिका उवाच” मात्र छंदों का संकलन नहीं, बल्कि समकालीन हिन्दी साहित्य में एक वैचारिक एवं रूपात्मक नवाचार है। यह संभवतः हिन्दी साहित्य के इतिहास में प्रथम प्रयास है, जहाँ आदिकाल के आर्यावर्त से लेकर 2025 के ‘अमृत काल’ तक के संपूर्ण भारतीय कालक्रम को एक सुव्यवस्थित ‘प्रतीकात्मक पुनर्पाठ’ (Symbolic Reinterpretation) के माध्यम से उद्घाटित किया गया है।
समय की सहयात्री और तटस्थ प्रेक्षक ‘मार्जरिका’ (एक कालजयी बिल्ली) के मुख से निस्सृत यह आख्यान शुष्क ऐतिहासिक तिथियों से परे जाकर राष्ट्र की सामूहिक आत्मा और ऐतिहासिक चेतना को टटोलता है।
प्रमुख विशेषताएँ
- 198 प्रतीकों का मानकीकृत प्रतीक-कोष: इस महाकाव्य की मूल शक्ति इसका विस्तृत प्रतीक-विधान है, जो जटिल राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक परिवर्तनों को साहित्यिक सघनता प्रदान करता है।
- कालखंडों का महाकाव्यात्मक विस्तार: ‘श्वेत कपोतों’ (शांति और स्वाधीनता के प्रारंभिक वर्ष) के युग से लेकर ‘महाबाघों’ (आधुनिक राष्ट्रीय पौरुष) के अभ्युदय तक का काव्यात्मक साक्ष्य।
- ऐतिहासिक पड़ावों का दस्तावेजीकरण: ‘रानी की तानाशाही’, ‘मौन कपोत’ का शासनकाल तथा ‘डिजिटल यज्ञ’ व ‘नभ-सारथी’ (अंतरिक्ष अन्वेषण) जैसी युगांतरकारी तकनीकी छलाँगों का सूक्ष्म विश्लेषण।
- भौगोलिक सीमाओं से परे सांस्कृतिक अस्मिता: भारत के राज्यों और क्षेत्रों का उनके पारंपरिक व सांस्कृतिक स्वरूप में पुनरन्वेषण।
- अध्येताओं हेतु अनिवार्य सेतु: प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC/State PCS) के अभ्यर्थियों, राजनीति विज्ञान के शोधार्थियों तथा विचारशील पाठकों के लिए भारत के ‘राष्ट्र-रथ’ को बिना किसी वैचारिक पूर्वाग्रह के वस्तुनिष्ठ रूप में समझने का अनूठा माध्यम।
“इतिहास, जहाँ कविता बनकर बोलता है।”
यह राष्ट्र की अखंड चेतना का वह काव्यात्मक एक्स-रे है, जो भावी पीढ़ियों के लिए एक अद्वितीय संदर्भ-ग्रंथ सिद्ध होगा।
उद्धरण कैसे दें
Ashodhiya, Anand Kumar. (2025). Ath Marjarika Uvaach. Avikavani Publishers.
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title = {Ath Marjarika Uvaach},
author = {Ashodhiya, Anand Kumar},
year = {2025},
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isbn = {978-93-5619-397-0},
language = {Hindi},
note = {A Symbolic Reinterpretation of Indian Chronology and History through 198 Standardized Symbols},
url = { https://anandkumarashodhiya.github.io/anand-kumar-ashodhiya/books/ath-marjarika-uvaach.html }
}
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लेखक के क्षेत्रीय संस्कृति, मौखिक इतिहास और लोक-साहित्य संबंधी शोध से जुड़े अन्य प्रकाशन:
- Heer–Ranjha (Ragnis 1–7) — Pingal Prosody Analysis
- Heer–Ranjha (Ragnis 8–16) — Cultural Study
- Bhagat Puranmal — Literary & Cultural Review
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