Anand Kumar Ashodhiya — Author · Poet · Researcher
हरयाणवी: बोली से भाषा तक का भाषाई सामर्थ्य
Haryanvi: Boli Se Bhasha Tak Ka Bhashai Samarthya — हरयाणवी भाषा की संरचना, अस्मिता एवं मानकीकरण पर समाजभाषावैज्ञानिक शोध-ग्रंथ

पुस्तक विवरण
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| अंग्रेज़ी शीर्षक | Haryanvi: Boli Se Bhasha Tak Ka Bhashai Samarthya |
| लेखक | आनन्द कुमार आशोधिया (कवि आनन्द शाहपुर) |
| भाषा | हिन्दी / हरियाणवी |
| प्रकाशन वर्ष | 2026 |
| ISBN | 978-93-5912-062-1 |
| विधा | भाषाविज्ञान · समाजभाषाविज्ञान · भाषाई मानकीकरण · सांस्कृतिक विमर्श |
| शैक्षणिक क्षेत्र | भारतीय भाषाएँ, समाजभाषाविज्ञान, भाषा प्रलेखन, बोली-विज्ञान, लोक-साहित्य, सांस्कृतिक अस्मिता |
| प्रकाशक | स्वयं प्रकाशित (आनन्द कुमार आशोधिया) |
पुस्तक के बारे में
“हरयाणवी: बोली से भाषा तक का भाषाई सामर्थ्य” हरयाणवी भाषा की भाषिक संरचना, मानकीकरण, सामाजिक स्वीकृति तथा सांस्कृतिक पहचान पर आधारित एक गंभीर भाषावैज्ञानिक एवं समाजभाषावैज्ञानिक शोध-कृति है। यह पुस्तक हरयाणवी को केवल एक क्षेत्रीय उपबोली के रूप में नहीं, बल्कि समृद्ध व्याकरणिक संरचना, सशक्त लोकसाहित्य, व्यापक सामाजिक व्यवहार और स्वतंत्र भाषिक अस्मिता से युक्त भाषा के रूप में स्थापित करने का प्रयास करती है।
इस शोध में हरयाणवी के ऐतिहासिक विकास, ध्वन्यात्मक संरचना, शब्द-संपदा, उपबोलियों, लोक-सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों तथा आधुनिक जनसंचार माध्यमों में उसकी उपस्थिति का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक भाषा और बोली के पारंपरिक विभाजन पर पुनर्विचार करते हुए यह प्रतिपादित करती है कि किसी भी भाषा की पहचान उसके सामाजिक प्रयोग, साहित्यिक परंपरा और सांस्कृतिक स्वीकार्यता से निर्मित होती है।
यह कृति भाषाविज्ञान, लोकसाहित्य, समाजशास्त्र, सांस्कृतिक अध्ययन तथा क्षेत्रीय भाषा-अध्ययन से जुड़े शोधार्थियों, विद्यार्थियों और अध्येताओं के लिए एक महत्त्वपूर्ण संदर्भ-स्रोत सिद्ध होती है। साथ ही, भारतीय लोकभाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और संवैधानिक विमर्श में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए भी यह पुस्तक अत्यंत उपयोगी और विचारोत्तेजक है।
उद्धरण कैसे दें
Ashodhiya, Anand Kumar. (2026). Haryanvi: Boli Se Bhasha Tak Ka Bhashai Samarthya. Self-published.
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year = {2026},
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}
संबंधित शोध प्रकाशन
लेखक के भाषावैज्ञानिक, पिंगल-शास्त्र और लोक-साहित्य संबंधी शोध से जुड़े अन्य प्रकाशन:
- Heer–Ranjha (Ragnis 1–7) — Pingal Prosody Analysis
- Heer–Ranjha (Ragnis 8–16) — Cultural Study
- Bhagat Puranmal — Literary & Cultural Review
शैक्षणिक प्रभाव
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- पिंगल शास्त्र पद्धति — हरियाणवी रागनी विश्लेषण की तकनीकी पद्धति
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- हरियाणवी छंद-शब्दावली — पिंगल शास्त्र और हरियाणवी छंद-विज्ञान की शब्दावली
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© 2026 Anand Kumar Ashodhiya | Independent Researcher & Former Warrant Officer, Indian Air Force